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_*मैं संजय धर्मचंद दीवान (दीवान ब्रदर्स, सूरत) , हम सबकी कर्मभूमि सूरत में धर्म के मर्म को अत्यंत सरल भाषा में समझने के उद्देश्य से एक 9 दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन कर रहा हूं।*_ _*इसके लिए दसवें तीर्थंकर भगवान् शीतल नाथ के तीन-तीन कल्याणकों की गरिमा से सुशोभित, बुंदेलखंड की पावन धरा पर विदिशा नागरी से जिनागम के सार को एकदम हृदय ग्राही भाषा में समझाने वाले, भोपाल विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर बाल ब्रह्मचारी पण्डित सुमत प्रकाशजी पधार रहे हैं।*_*_वैराग्य की प्रतिमूर्ति सुमत प्रकाश जी ने जीवन-यापन के लिए आवश्यक निश्चित राशि से अधिक सभी कुछ त्याग कर ब्रह्मचर्य व्रत लिया और अपना संपूर्ण जीवन जिनवाणी माता की सेवा में लगा दिया। संस्कृत, प्राकृत, हिंदी और अंग्रेजी आदि अनेकों भाषाओं और चारोँ अनुयोगों में पारंगत पंडित जी के अंतर में मानो जिनवाणी माँ का निवास है। आगम के अनुरूप ही जीवन-चर्या रखने वाले पंडित जी की कथनी और करनी में जरा भी भेद नहीं है।_*_ *_बंधुओं इस ज्ञान-यज्ञ की सफलता के लिए, वरिष्ठ-जनों से मुझे अपनी गरिमा-मय उपस्थिति एवम् आशीर्वाद की, समवयस्क और अनुजों से मुझे भरपूर लाभ लेने की एवम् सहयोग की अपेक्षा है।