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आ.बाबु जुगलकिशोरजी कोटा
जन्म तिथि एवं ग्राम ५ अप्रैल १९२४ ग्राम खुरी (जिला-बांरा) राज. के एक पोरवाल उज्जवल धवल गौत्रीय एक वैष्णव परिवार में हुआ था | देवीलाल कानाबाई दिग.जैन परिवार में दत्तक पुत्र बनकर आये थे | माता पिता का नाम केशर बाई श्रीमान राम प्रताप बारां शिक्षा एम.ए. हिंदी एवं इंग्लिश लिट्रेचर से शिक्षा प्राप्त की | पत्नी का नाम श्रीमती रतन देवी पुत्र चिन्मय जैन, पत्नी आनंद धारा झांझरी, व्यवसायरत कोटा | चिदात्म चिरन्तन पुत्री शशिप्रभा – हर्षवर्द्धन, ओरंगाबाद, अर्चना – प्रदीप झांझरी उज्जैन, कु./ब्र.नीलिमा जैन कोटा रचना १५ वर्ष की आयु में काव्य लिखने लगे थे | १९५० में आत्म धर्म पत्रिका मिली जिससे लगा कि भगवान आत्मा कहने वाला कौन है ? श्रावण मास में बाबु गयानचन्द्र जी के साथ प्रथम वार सोनगढ़ गए | लोटते समय रेल की बर्थ पर केवल रवि किरणों वाली देव-शास्त्र-गुरु पूजा के अष्टक लिखे थे | १९६२- में सन्मति सन्देश में छपी थी कविता लो रोको तूफान चला रे | देश भक्ति के अनेक कार्यकरम, कवी सम्मलेन, आधुनिक कवियों के काव्य संग्रह, वाटिका , सम्मान समारोह अखिल भारतीय मुमुक्षु समाज द्वारा जून २००२ कोटा में हुआ था | प्रेरक प्रसंग १-१९७५ में स्वामीजी को पधारना था मीटिंग बैठी समाज की, इतना पैसा कहाँ से आएगा | आपने कहा कि पैसे की चिंता छोड़कर आगे की बात करो | दूसरे दिन अपना स्वर्ण गिरबी रखकर १ लाख रु दिए थे | सबसे ऐतिहासिक सफल प्रशंसनीय शिविर था बारात से भी बढकर आत्मार्थिओं का स्वागत किया गया था | अनेकों नाई, इस्त्री करने वाले लगाए गए थे | २-स्वस्थ रहते हमेंशा नीचे बैठकर प्रवचन सुनते हैं, बालक का भी प्रवचन हो तो भी लघुता पूर्वक सुनते हैं | मांगने पर योग्य मार्गदर्शन भी देते हैं | आपने स्वाध्याय करते हुये सुंदर नोट्स बनाये हैं जिन्हें प्रतिदिन देखा जा सकता है | लोकेषणा से दूर, स्पष्ट बक्ता हैं, सम्मेदशिखर एवं अन्य शिविरों में जो भी उन्हें अनुचित लगता उसे मंच से ही कह देते हैं | ३५ वर्षों से ब्रोंकाइटीस से पीढ़ित हैं परन्तु प्रवचन करते रहे और पिछले कुछ वर्षों से रोग वृद्धि के कारण घर पर आने वाले प्यासे मुमुक्षुओं की तृषा को १-१½ घंटे तक शांत/ समाधान करते हैं | आदर्श आत्मार्थी हैं | प्रवचनकार बनने का मार्गदर्शन देते हैं | करुणावश सारे जीवन के अनुभव उढ़ेल देते हैं | आपकी विशेषता उत्तम लोक व्यवहार – रात्रि ११ बजे भी आकर देखते कि विद्वान की व्यवस्था पूर्ण है कि नहीं | जीने पर विद्युत प्रकाश बराबर है कि नहीं | शील की मर्यादा प्रवचन एवं कार्यकरम आदि में रहना चाहिए इसका ध्यान | विद्वानों की एकता अपेक्षित है, गहरे दूरदृष्टा –चिंतक हैं | पर्याय की अत्यंत उपेक्षा करुणासूचक है | और वह अनेकान्त की सुगंध से भरपूर है | तत्वगयानी पुरुष, पूजा बाले बाबूजी कहकर सारा जग उन्हें परिचय करता कराता है | जैना वाच कंपनी देहली बालों के उद्गार | गुणेषु प्रमोदं – आत्मीयता | गयानी परिस्थिति की शिकायत नहीं करता हैं | आत्मधर्म १९५० में “पहली ही वार युगों से लुप्त प्रायः जैन दर्शन के रहस्य को उस पुरुष की दिव्य वाणी में सुनकर हमें लगा की हमें मुक्ति का विधाता मिल गया है और हमने अपना संचित संपूर्ण गयान उस पुरुष के चरणों में विखेर दिया | ” आपके विचार सोनगढ़ ५-७ वार गये | निर्णय हो गया यही सत्यमार्ग है | मैंने ज्यादा पढ़ा नहीं है परन्तु विचार ज्यादा किया है | गुरुदेव श्री को सुनने के लिए एकाग्रता एवं गयान की बारीकी चाहिए | हमारा सब कुछ तात्विक निर्णय/ गतिविधि गुरुदेवश्री के बिना शून्य हो जाता है | आश्चर्य जनक – गुरुदेवश्री का जहां जन्म हुआ वहां इस तत्व की गंध नहीं है, वहां विचारधारा भी बिरुद्ध है | दीक्षा भी वहीं हुई | एक ही ग्रन्थ पाकर मुख से निकला अहो ! यह तो अशरीरी होने का शास्त्र है | कम पढ़े लिखे, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी न पढ़े होने पर भी बिना सहारे अर्थ निकाला यदि दिग. सहयोग लेते तो यह अर्थ न निकाल पाते, गुमराह हो जाते | दीक्षा से गुरुत्व मिला अतः लाखों परिवर्तित हो गये यदि गृहस्थ होते तो यह प्रभावना न हो पाती | अर्थात जो हुआ ठीक ही हुआ | बाबूजी के शब्दों में –मेंरे ससुराल वालों में स्थानकवासी भी थे वे साधुओं से मेंरे सोनगढ़ के वारे में बताते थे तो वे कहते उन्हें रोक लो वहाँ तो जादू होता है | विचक्षण बुद्धि देवलाली में केसेट २६—५-८९ को सुनी जो गुज. प्रवचन था के अनुसार बंध अधिकार पर ३ दिन प्रवचन सुने समझ में नहीं आये तो जाने का मन हो गया परन्तु गयानचंदजी के अनुरोध पर रुक गए | हीराचंद जी की कक्षा में सिद्धांत प्रवेशिका पढ़ी | उन्होंने पूछा मोक्षमार्ग में घोड़ा गाड़ी चलती है कि नहीं ? ३ दिन में ही प्रवचन समझ में आने लगे | फिर तो २० दिन रहे | गयानचंदजी ३-४ माह रहे | परिषद परीक्षा बोर्ड से धर्म विशारद पढ़ी, प्रवचनसारजी को ३ दिन में पढ़कर परीक्षा दी अर्थात बुद्धि – मेघा तीव्र थी |