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Mumukshu

Vidhwan

लालचन्द्र भाई मोदी

जन्म तिथि लीम्बुडा तालुका मानाबदर सोराष्ट्र १६-६-१० - अवसान राजकोट में माह सूद ९ स. १९६२ में रात्रि १-२० पर २१-२-१९९८ माता-पिता का नाम फूलबा एवं अमरचन्द्र मोदी १३-१४ वर्ष में माँ गुजर गई | शिक्षा साधारण परिवार पहली पत्नी- १९ वर्ष में शांताबेन २ पुत्र १ पुत्री छोड़ कर गुजर गई | दूसरी पत्नी - नबल बेन से ३ पुत्र ३ पुत्रीकांति भाई का पुत्र हिमांशु – ९२२५७७४८८५-२-दीपक की पत्नी सीमा २- पानू भाई ३- प्रवीन ४- नितिन भाई कोलकाता | व्यवसाय १८ वर्ष में नोकरी एवं व्यवसाय वेराबल एवं राजकोट में आकर बस गये |सन १९५० में राजकोट में २६ – २७ की उम्र में डॉ बन चुके थे गुरुदेवश्री को इंजेक्शन देने आते थे गुरुदेवश्री का परिचय 1- एक वर्ष शरणारामजी बढौत यु पी से लाभ लिया जिससे रूचि लगी |स.१९९६ में जेतपुर में प्रथम परिचय हुआ रचनात्मक कार्य ४० कि उम्र में स्वाध्याय करने के बाद ४४ कि उम्र में प्रवचन प्रारम्भ | भारत में अध्यात्म कि धूम मचा दी थी | परमागम प्रतिष्ठा में माता-पिता बने थे परन्तु ब्र. पहले से ही पालते थे | गुरुदेवश्री बोले- “आ प्रतिगया नवल बेन माटे छे |” प्रेरक प्रसंग 2- गुरुदेवश्री - प्रवचन में आते हो ? धर्म का परिचय नहीं/ आया करो | 3- गुरुदेव ने श्रीमदजी वचनामृत दिया | 4- एक वार लालुभाई राजकोट मुरेना पधारे वहाँ उन्हें पंचास्तिकाय ग्रंथ मिला तो खरीदना चाहा | परंतु वह देना नहीं चाहता था | तो 200/- रु॰देकर खरीदा था |