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मल्लिनाथ बाबा गोड पाटिल - एम॰ बी॰ पाटिल
जन्म तिथि २-१-१९३० अवसान – ३०-११-२००७ जन्मभूमि – शेड्वाल (१९८८ तक कर्मभूमि), १९८९ से वेलगाव आ गये | ७७ वर्ष माता-पिता का नाम गंगाबाई - १९४३में अवसान बाबागोड पाटिल १९५६ में अवसान | पिता की ९ में से ८ वी सन्तान थे – १- अन्ना साहेब २- तात्या साहेब ३- सत्य गोडा ४- मल्लिगौडा पाटिल १- बहिनें- १- अम्मक्का २- सानावाई ३- बंगारी ४- होशक्का ५- सुंदरा बाई २- १३ वर्ष की उम्र में मां गुजर गई | शिक्षा १- शिक्षा – ७ वी पास कक्षा १० वी तक की संस्कृत १ माह में सीख ली | फिर आगे की संस्कृत, मराठी, हिंदी, गुजराती, पुरानी कन्नड़,तमिल, प्राकृत लिखना बोलना स्वतः प्रतिभा से सीखा | परिवार कुसुम पाटिल –पति के लिए सदा समर्पित नारी ये संतान – १- अजित-१९५९-२००५ (इनकी पत्नी एक बेटी हैं |) २- धवलश्री (९७४३६१९१०८) – २२ नव १९६३ व्यवसाय बेलगाँव के सेठ ने प्रेस बेचकर चले गए | शेड्वाल में ४ वर्ष तक प्रिंटिंग प्रेस चलाई थी जिसमे पेडल चलाना पड़ता था | विजली वाली प्रेस नहीं थी | उसका अनुभव सारे जीबन ग्रन्थ मुद्रण में काम आया | कमाने की रूचि न होने से एवं काम ज्यादा न होने से बंद करना पड़ी | किसी भी पुस्तक में शुद्धि पत्रक लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी | लिखने से ज्यादा समय एवं श्रम प्रूफ रीडिंग में व्यय हुआ | प्रथम प्रूफ बेटी एवं दूसरा तीसरा प्रूफ स्वयं चेक करते थे | बड़े जमींदार थे अतः जमींदारी एवं अन्य व्यवसाय पर तृष्णा नहीं की | गुरुदेवश्री का परिचय १- शेडवाल में आपने आदिसागर जी से स्वामीजी का नाम एवं अध्यात्म पहली वार सुना था | २- यात्रा करते-२ १९५१ में पहली वार गुरुदेव को राजकोट में सुना और रोमांच हो गया था, लगा कि यह कोई अद्भुत बात हैं | पहली वार लगा कि ऐसा भी कोई गुरु हैं जो यह कहता है कि समझ में आया | तब ही से हिंदी आत्मधर्म पढना शुरू कर दिया | रचनात्मक कार्य ३- बालकवि – कक्षा ५ से ही स्कुल जाते समय कवितायें बनाने लगे थे | प्रेरक प्रसंग १- १९८१ में समयसार अनुवाद ४ माह में कर दिया परन्तु छपने मात्र में १५ माह लगे थे | १९८३ में कर्नाटक के बीरेन्द्र हेगड़े ने बेंगलोर के टाउन हाल में विमोचन किया उस कार्यकरम में भी आप नहीं गये | ख्याति लाभ से कोशों दूर थे | प्रतिदिन १८ घंटे अनुवाद कार्य करने की ताकत मात्र आपमें ही हैं, इसीसे इतनी शीघ्रता से यह ग्रन्थ का अनुवाद सम्भव हो सका | २- पंचास्तिकाय ग्रन्थ का अनुवाद मोक्षमार्ग प्रकाशक एवं समयसार ग्रन्थ के वाद मात्र ६० दिन में शेड्वाल में ही कर दिया | इसमें भी उनने शयन एवं भोजन आदि भी किया | अर्थात मात्र ४६ दिन में यह काम किया हम लगातार पढ़ नहीं सकते उन्होंने इसे अनुवाद करने जैसा कठिन कार्य कर दिया | धन्य हैं इन ‘कुंदकुंद पुत्र’ को | ३- गुरुदेव ने आपकी प्रतिभा से प्रसन्न होकर गले लगा लिया था क्योंकि आपने सबसे पहले मोक्षमार्ग प्रकाशक का अनुवाद किया था | सोनगढ़ में ही भभूतमल भंडारी जी ने कहा कि इसे छपाने का लाभ लेना चाहता हूँ | ४- अनुवादित सहित्य – समयसार पंचास्तिकाय प्रवचनसार नियमसार अष्टपाहुड योगसार परमात्मप्रकाश इष्टोपदेश समाधितंत्र पद्मनंदीपञ्चविशातिका कार्तिकेयानुप्रेक्षा रत्नकरंडश्रावकाचार-सदासुखदास कृत वचनिका पुरुषार्थसिद्धि उपाय वृहतद्रव्यसंग्रह द्रव्यसंग्रह -चामुंडाराय कृत टीका मोक्षशास्त्र – रामजीभाई कृत टीका आत्मानुशासन तत्वगयानतरंगणी विषापहार वैभव गुरुदेवश्री के प्रवचन भक्तामर प्रवचन गुरुदेवश्री के प्रवचन बहिनश्री के वचनामृत गुरुदेवश्री के प्रवचन गुरुदेवश्री के वचनामृत वीतराग विगयान(छहढाला पर गुरुदेवश्री के प्रवचन) पंचास्तिकाय परिमल गुरुदेवश्री के प्रवचन कुन्दकुन्द शतक शुद्धात्म शतक आप कुछ भी कहो पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव णमोकार महामन्त्र छहढाला करमबद्ध पर्याय भव्यामृत मोक्षमार्ग प्रकाशक तत्वार्थसुत्र अनुवादित पद्य साहित्य समयसार पंचास्तिकाय प्रवचनसार नियमसार अष्टपाहुड योग्सार परमात्मप्रकाश इष्टोपदेश द्रव्यसंग्रह समाधिशतक छहढाला भक्तामर स्तोत्र विषापहार स्तोत्र कन्नड़ आत्मधर्म मासिक १०५०० पृष्ठों का सम्पादन ३० वर्ष में स्वतंत्र साहित्य कृति कुन्द्राद्रीदर्शन गोम्मटदर्शनम पोन्नुरप्रभे धर्म दीपक आत्म वैभव सम्यकत्वसौरभ (कहानियां) जन्म मरण निगल(बेड़ी) अक्षयचक्षु (समयसार रचना इतिहास) अकृतनिंद अहमिन्द्र मृगजल पाषाण खंड भव्यामृत आचार्य कुन्दकुन्द भक्ति वाहिनी पञ्च परमागम पद्य सामायिक पाठ भावपूजा समयसार स्तुति मोक्षशास्त्र दर्शन पंचामृत पद्य कुन्दकुन्द सूक्त सुधा देव शास्त्र गुरु पूजा आपके अवसान उपरान्त भी आपकी बेटी धवल श्री भी निम्न ग्रंथों के अनुवाद कर रहीं हैं एवं प्रकाशित ग्रंथों की सूचि निम्नानुसार है | ग्रन्थ का नाम ग्रन्थ का विषय परमभाव स्वरूप समयसार ३२० गाथा जयसेनाचार्य टीका पर गुरुदेवश्री का प्रवचन | समयसार कलश अमृत चन्द्र कृत कलश पर प. राजमल जी कृत टीका | अलिंग ग्रहण प्रवचनसार गाथा १७२, पर गुरुदेवश्री का प्रवचन | बारस अनुबेख्खा आ. कुन्दकुन्द कृत | आत्म प्रसिद्धि ४७ शक्तियों पर गुरुदेवश्री का प्रवचन | मृत्यु महोत्सव प. सूरचन्द्र रचित काव्य और भगवती आराधना का कवच अधिकार सार | १- -साभार – जिनवाणी का बालक –एमबी पाटिल का जीवन परिचय (कन्नड़ प्रति), बेलगाँव के साधर्मी बन्धु | ३- मनकापुर से शुद्धाम्नाय का प्रसार प्रारम्भ हुआ | शुद्ध तेरा पंथाम्नाय अनुसार प्रतिष्ठा कराई | १९८४ में एक प. विवेक शास्त्री आये थे उन्हें वहां विरोध का सामना करना पढ़ा तो दुसरे मंदिर में प्रवचन करते समय वहां भी विरोध हुआ तो यहाँ के प्रधान उत्साही ने दोनों भट्टारक की चिंता छोड़ प्रवचन कराये तब पहली वार छहढाला मोक्षमार्ग प्रकाशक पर प्रवचन सुने तब से यहाँ स्वाध्याय पाठशाला का प्रचलन प्रारम्भ हुआ | ४- शेड्वाल कागवाड में ६००-७०० वर्ष पूर्व का मंदिर हैं ग्रांम में आज भी मैं गेट बना हैं जिस पर ब्रह्म परमेश्वर मंदिर लिखा है जिस पर तीन लोक का चिन्ह एवं ॐ बना हैं इस मंदिर का बाहरी भाग मस्जिद जैसा हैं अंदर से हिन्दू मंदिर जैसा हैं परन्तु ४ मूर्तियाँ दिग जैन की हैं जिनमे पार्श्वनाथ एवं चतुर्मुख प्रतिमा भी हैं | इस के तहखाने में २ मंजिल और नीचे जाने का संकरा मार्ग हैं जहाँ आज भी ५ फुट ऊंची पार्श्वनाथ की प्रतिमा हैं | ५- उगार जिन मंदिर का इतिहास- ७०० वर्ष पूर्व १० किलो मीटर दूर ग्राम में बच्चे अंटी-कांच की गोली खेलने के लिए छोटा सा गड्डा कर रहे थे तो मस्तिक दिखा थोडा ओर खोदा तो प्रतिमा दिखने लगी सारे आस पास के ग्राम वाले आ गये प्रतिमा निकाली सभी कहने लगे प्रतिमा हम ले जायेंगे | परन्तु किसी से उठे ही नहीं तब उगार वालों से उठी अब प्रश्न किस मंदिर में ले जावें तो निर्णय हुआ की जहाँ बैलगाडी टूटेगी वहीँ मंदिर बनेगा | इसी स्थान पर बैलगाड़ी टूटी यहाँ कोई जैन घर न था तब कुम्हार लोगों की वस्ती दूसरी जगह बना कर वसाया और जैन वस्ती यहाँ बनाई | पुराना मंदिर ध्वस्त होने पर नया मंदिर बनाया हैं यहाँ स्वाध्याय का सुंदर करम चलता हैं |